श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 11.17.28

एकादश स्कन्ध · अध्याय 17 · अथ सप्तदशोऽध्यायः

सायं प्रातरुपानीय भैक्ष्यं तस्मै निवेदयेत्।

यच्चान्यदप्यनुज्ञातमुपयुंजीत संयतः॥ २८

sāyaṃ prātarupānīya bhaikṣyaṃ tasmai nivedayet|

yaccānyadapyanujñātamupayuṃjīta saṃyataḥ|| 28

अर्थ

सायंकाल और प्रातःकाल दोनों समय जो कुछ भिक्षामें मिले वह लाकर गुरुदेवके आगे रख दे। केवल भोजन ही नहीं, जो कुछ हो सब। तदनन्तर उनके आज्ञानुसार बड़े संयमसे भिक्षा आदिका यथोचित उपयोग करे॥ २८॥

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