॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 11.18.16
दृष्टिपूतं न्यसेत् पादं वस्त्रपूतं पिबेज्जलम्।
सत्यपूतां वदेद् वाचं मनःपूतं समाचरेत्॥ १६
dṛṣṭipūtaṃ nyaset pādaṃ vastrapūtaṃ pibejjalam|
satyapūtāṃ vaded vācaṃ manaḥpūtaṃ samācaret|| 16
अर्थ
नेत्रोंसे धरती देखकर पैर रखे, कपड़ेसे छानकर जल पिये, मुँहसे प्रत्येक बात सत्यपूत—सत्यसे पवित्र हुई ही निकाले और शरीरसे जितने भी काम करे, बुद्धि-पूर्वक—सोच-विचार कर ही करे॥ १६॥