श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 11.18.29

एकादश स्कन्ध · अध्याय 18 · अथाष्टादशोऽध्यायः

बुधो बालकवत् क्रीडेत् कुशलो जडवच्चरेत्।

वदेदुन्मत्तवद् विद्वान् गोचर्यां नैगमश्‍चरेत्॥ २९

budho bālakavat krīḍet kuśalo jaḍavaccaret|

vadedunmattavad vidvān gocaryāṃ naigamaścaret|| 29

अर्थ

वह बुद्धिमान् होकर भी बालकोंके समान खेले। निपुण होकर भी जडवत् रहे, विद्वान् होकर भी पागलकी तरह बातचीत करे और समस्त वेद-विधियोंका जानकार होकर भी पशुवृत्तिसे (अनियत आचारवान्) रहे॥ २९॥

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