श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 11.18.42

एकादश स्कन्ध · अध्याय 18 · अथाष्टादशोऽध्यायः

भिक्षोर्धर्मः शमोऽहिंसा तप ईक्षा वनौकसः।

गृहिणो भूतरक्षेज्या द्विजस्याचार्यसेवनम्॥ ४२

bhikṣordharmaḥ śamo'hiṃsā tapa īkṣā vanaukasaḥ|

gṛhiṇo bhūtarakṣejyā dvijasyācāryasevanam|| 42

अर्थ

संन्यासीका मुख्य धर्म है—शान्ति और अहिंसा। वानप्रस्थीका मुख्य धर्म है—तपस्या और भगवद्भाव। गृहस्थका मुख्य धर्म है—प्राणियोंकी रक्षा और यज्ञ-याग तथा ब्रह्मचारीका मुख्य धर्म है—आचार्यकी सेवा॥ ४२॥

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