श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 11.18.48

एकादश स्कन्ध · अध्याय 18 · अथाष्टादशोऽध्यायः

एतत्तेऽभिहितं साधो भवान् पृच्छति यच्च माम्।

यथा स्वधर्मसंयुक्तो भक्तो मां समियात् परम्॥ ४८

etatte'bhihitaṃ sādho bhavān pṛcchati yacca mām|

yathā svadharmasaṃyukto bhakto māṃ samiyāt param|| 48

अर्थ

साधुस्वभाव उद्धव! तुमने मुझसे जो प्रश्‍न किया था, उसका उत्तर मैंने दे दिया और यह बतला दिया कि अपने धर्मका पालन करनेवाला भक्त मुझ परब्रह्म-स्वरूपको किस प्रकार प्राप्त होता है॥ ४८॥

इति श्रीमद्भागवते महापुराणे पारमहंस्यां संहितायामेकादशस्कन्धे अष्टादशोऽध्यायः

॥ १८॥

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