श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 11.18.8

एकादश स्कन्ध · अध्याय 18 · अथाष्टादशोऽध्यायः

अग्‍निहोत्रं च दर्शश्‍च पूर्णमासश्‍च२ पूर्ववत्।

चातुर्मास्यानि च मुनेराम्‍नातानि च नैगमैः॥ ८

agnihotraṃ ca darśaśca pūrṇamāsaśca pūrvavat|

cāturmāsyāni ca munerāmnātāni ca naigamaiḥ|| 8

अर्थ

वेदवेत्ताओंने वानप्रस्थीके लिये अग्‍निहोत्र, दर्श, पौर्णमास और चातुर्मास्य आदिका वैसा ही विधान किया है, जैसा गृहस्थोंके लिये है॥ ८॥

टिप्पणियाँ

  1. २

    पौर्णमासः।

     

    (मुद्रित पृष्ठ 822)

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