श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 11.19.17

एकादश स्कन्ध · अध्याय 19 · अथैकोनविंशोऽध्यायः

श्रुतिः प्रत्यक्षमैतिह्यमनुमानं चतुष्टयम्।

प्रमाणेष्वनवस्थानाद् विकल्पात् स विरज्यते॥ १७

śrutiḥ pratyakṣamaitihyamanumānaṃ catuṣṭayam|

pramāṇeṣvanavasthānād vikalpāt sa virajyate|| 17

अर्थ

श्रुति, प्रत्यक्ष, ऐतिह्य (महापुरुषोंमें प्रसिद्धि) और अनुमान—प्रमाणोंमें यह चार मुख्य हैं। इनकी कसौटीपर कसनेसे दृश्य प्रपंच अस्थिर, नश्‍वर एवं विकारी होनेके कारण सत्य सिद्ध नहीं होता, इसलिये विवेकी पुरुष इस विविध कल्पनारूप अथवा शब्दमात्र प्रपंचसे विरक्त हो जाता है॥ १७॥✎ 1753

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1753 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: पंच-तन्मात्रा—ये → पंचतन्मात्रा—ये

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