॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 11.19.8
उद्धव उवाच
ज्ञानं विशुद्धं विपुलं यथैत-
द्वैराग्यविज्ञानयुतं पुराणम्।
आख्याहि विश्वेश्वर विश्वमूर्ते
त्वद्भक्तियोगं च महद्विमृग्यम्॥ ८
jñānaṃ viśuddhaṃ vipulaṃ yathaita-
dvairāgyavijñānayutaṃ purāṇam|
ākhyāhi viśveśvara viśvamūrte
tvadbhaktiyogaṃ ca mahadvimṛgyam|| 8
अर्थ
उद्धवजीने कहा—विश्वरूप परमात्मन्! आप ही विश्वके स्वामी हैं। आपका यह वैराग्य और विज्ञानसे युक्त सनातन एवं विशुद्ध ज्ञान जिस प्रकार सुदृढ़ हो जाय, उसी प्रकार मुझे स्पष्ट करके समझाइये और उस अपने भक्तियोगका भी वर्णन कीजिये, जिसे ब्रह्मा आदि महापुरुष भी ढूँढ़ा करते हैं॥ ८॥