श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 11.2.13

एकादश स्कन्ध · अध्याय 2 · अथ द्वितीयोऽध्यायः

त्वया परमकल्याणः पुण्यश्रवणकीर्तनः।

स्मारितो भगवानद्य देवो नारायणो मम॥ १३

tvayā paramakalyāṇaḥ puṇyaśravaṇakīrtanaḥ|

smārito bhagavānadya devo nārāyaṇo mama|| 13

अर्थ

जिनके गुण, लीला और नाम आदिका श्रवण तथा कीर्तन पतितोंको भी पावन करनेवाला है, उन्हीं परम कल्याणस्वरूप मेरे आराध्यदेव भगवान् नारायणका तुमने आज मुझे स्मरण कराया है॥ १३॥

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