श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 11.2.16

एकादश स्कन्ध · अध्याय 2 · अथ द्वितीयोऽध्यायः

तमाहुर्वासुदेवांशं मोक्षधर्मविवक्षया।

अवतीर्णं सुतशतं तस्यासीद् ब्रह्मपारगम्॥ १६

tamāhurvāsudevāṃśaṃ mokṣadharmavivakṣayā|

avatīrṇaṃ sutaśataṃ tasyāsīd brahmapāragam|| 16

अर्थ

शास्त्रोंने उन्हें भगवान् वासुदेवका अंश कहा है। मोक्षधर्मका उपदेश करनेके लिये उन्होंने अवतार ग्रहण किया था। उनके सौ पुत्र थे और सब-के-सब वेदोंके पारदर्शी विद्वान् थे॥ १६॥

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