तुम जानते ही हो कि स्वायम्भुव मनुके एक प्रसिद्ध पुत्र थे प्रियव्रत। प्रियव्रतके आग्नीध्र, आग्नीध्रके नाभि और नाभिके पुत्र हुए ऋषभ॥ १५॥
प्रियव्रतो नाम सुतो मनोः स्वायम्भुवस्य यः।
तस्याग्नीध्रस्ततो नाभिर्ऋषभस्तत्सुतः स्मृतः॥ १५
तुम जानते ही हो कि स्वायम्भुव मनुके एक प्रसिद्ध पुत्र थे प्रियव्रत। प्रियव्रतके आग्नीध्र, आग्नीध्रके नाभि और नाभिके पुत्र हुए ऋषभ॥ १५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 11.2.15 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 715) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/11/2/15/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
#1212 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): नाभिऋर्षभस्तत्सुत: → नाभिऋर्ऋषभस्तत्सुतः
#1213 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): नाभिऋर्ऋषभस्तत्सुत: → नाभिर्ऋषभस्तत्सुतः