विदेहराज निमिने उन्हें भगवान्के परम प्रेमी भक्त जानकर यथायोग्य आसनोंपर बैठाया और प्रेम तथा आनन्दसे भरकर विधिपूर्वक उनकी पूजा की॥ २६॥
विदेहस्तानभिप्रेत्य नारायणपरायणान्।
प्रीतः सम्पूजयांचक्रे आसनस्थान् यथार्हतः॥ २६
विदेहराज निमिने उन्हें भगवान्के परम प्रेमी भक्त जानकर यथायोग्य आसनोंपर बैठाया और प्रेम तथा आनन्दसे भरकर विधिपूर्वक उनकी पूजा की॥ २६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 11.2.26 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 716) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/11/2/26/