श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 11.2.28

एकादश स्कन्ध · अध्याय 2 · अथ द्वितीयोऽध्यायः

विदेह उवाच

मन्ये भगवतः साक्षात् पार्षदान् वो मधुद्विषः।

विष्णोर्भूतानि लोकानां पावनाय चरन्ति हि॥ २८

manye bhagavataḥ sākṣāt pārṣadān vo madhudviṣaḥ|

viṣṇorbhūtāni lokānāṃ pāvanāya caranti hi|| 28

अर्थ

विदेहराज निमिने कहा—भगवन्! मैं ऐसा समझता हूँ कि आपलोग मधुसूदन भगवान्‌के पार्षद ही हैं, क्योंकि भगवान्‌के पार्षद संसारी प्राणियोंको पवित्र करनेके लिये विचरण किया करते हैं॥ २८॥

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