aṃjaḥ puṃsāmaviduṣāṃ viddhi bhāgavatān hi tān|| 34
अर्थ
भगवान्ने भोले-भाले अज्ञानी पुरुषोंको भी सुगमतासे साक्षात् अपनी प्राप्तिके लिये जो उपाय स्वयं श्रीमुखसे बतलाये हैं, उन्हें ही ‘भागवत धर्म’ समझो॥ ३४॥✎ 899
ये वै भगवता प्रोक्ता उपाया ह्यात्मलब्धये।
अंजः पुंसामविदुषां विद्धि भागवतान् हि तान्॥ ३४
भगवान्ने भोले-भाले अज्ञानी पुरुषोंको भी सुगमतासे साक्षात् अपनी प्राप्तिके लिये जो उपाय स्वयं श्रीमुखसे बतलाये हैं, उन्हें ही ‘भागवत धर्म’ समझो॥ ३४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 11.2.34 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 717) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/11/2/34/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)