श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 11.2.7

एकादश स्कन्ध · अध्याय 2 · अथ द्वितीयोऽध्यायः

ब्रह्मंस्तथापि पृच्छामो धर्मान् भागवतांस्तव।

याञ्छ्रुत्वा श्रद्धया मर्त्यो मुच्यते सर्वतोभयात्॥ ७

brahmaṃstathāpi pṛcchāmo dharmān bhāgavatāṃstava|

yāñchrutvā śraddhayā martyo mucyate sarvatobhayāt|| 7

अर्थ

ब्रह्मन्! (यद्यपि हम आपके शुभागमन और शुभ दर्शनसे ही कृतकृत्य हो गये हैं) तथापि आपसे उन धर्मोंके—साधनोंके सम्बन्धमें प्रश्‍न कर रहे हैं, जिनको मनुष्य श्रद्धासे सुन भर ले तो इस सब ओरसे भयदायक संसारसे मुक्त हो जाय॥ ७॥

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