॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 11.22.49
तरोर्बीजविपाकाभ्यां यो विद्वांजन्मसंयमौ।
तरोर्विलक्षणो द्रष्टा एवं द्रष्टा तनोः पृथक्॥ ४९
tarorbījavipākābhyāṃ yo vidvāṃjanmasaṃyamau|
tarorvilakṣaṇo draṣṭā evaṃ draṣṭā tanoḥ pṛthak|| 49
अर्थ
जैसे जौ-गेहूँ आदिकी फसल बोनेपर उग आती है और पक जानेपर काट दी जाती है, किन्तु जो पुरुष उनके उगने और काटनेका जाननेवाला साक्षी है, वह उनसे सर्वथा पृथक् है; वैसे ही जो शरीर और उसकी अवस्थाओंका साक्षी है, वह शरीरसे सर्वथा पृथक् है॥ ४९॥