श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 11.23.4

एकादश स्कन्ध · अध्याय 23 · अथ त्रयोविंशोऽध्यायः

कथयन्ति महत्पुण्यमितिहासमिहोद्धव।

तमहं वर्णयिष्यामि निबोध सुसमाहितः॥ ४

kathayanti mahatpuṇyamitihāsamihoddhava|

tamahaṃ varṇayiṣyāmi nibodha susamāhitaḥ|| 4

अर्थ

उद्धवजी! इस विषयमें महात्मालोग एक बड़ा पवित्र प्राचीन इतिहास कहा करते हैं; मैं वही तुम्हें सुनाऊँगा, तुम मन लगाकर उसे सुनो॥ ४॥

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