श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 11.23.42

एकादश स्कन्ध · अध्याय 23 · अथ त्रयोविंशोऽध्यायः

परिभूत इमां गाथामगायत नराधमैः।

पातयद्भिः स्वधर्मस्थो धृतिमास्थाय सात्त्विकीम्॥ ४२

paribhūta imāṃ gāthāmagāyata narādhamaiḥ|

pātayadbhiḥ svadharmastho dhṛtimāsthāya sāttvikīm|| 42

अर्थ

यद्यपि नीच मनुष्य तरह-तरहके तिरस्कार करके उसे उसके धर्मसे गिरानेकी चेष्टा किया करते, फिर भी वह बड़ी दृढ़तासे अपने धर्ममें स्थिर रहता और सात्त्विक धैर्यका आश्रय लेकर कभी-कभी ऐसे उद्गार प्रकट किया करता॥ ४२॥

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