श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 11.24.26

एकादश स्कन्ध · अध्याय 24 · अथ चतुर्विंशोऽध्यायः

स लीयते महान् स्वेषु गुणेषु गुणवत्तमः।

तेऽव्यक्ते संप्रलीयन्ते तत् काले लीयतेऽव्यये॥ २६

sa līyate mahān sveṣu guṇeṣu guṇavattamaḥ|

te'vyakte saṃpralīyante tat kāle līyate'vyaye|| 26

अर्थ

ज्ञानशक्ति और क्रियाशक्तिप्रधान महत्तत्त्व अपने कारण गुणोंमें लीन हो जाता है। गुण अव्यक्त प्रकृतिमें और प्रकृति अपने प्रेरक अविनाशी कालमें लीन हो जाती है॥ २६॥

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