श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 11.24.5

एकादश स्कन्ध · अध्याय 24 · अथ चतुर्विंशोऽध्यायः

तमो रजः सत्त्वमिति प्रकृतेरभवन् गुणाः।

मया प्रक्षोभ्यमाणायाः पुरुषानुमतेन च॥ ५

tamo rajaḥ sattvamiti prakṛterabhavan guṇāḥ|

mayā prakṣobhyamāṇāyāḥ puruṣānumatena ca|| 5

अर्थ

उद्धवजी! मैंने ही जीवोंके शुभ-अशुभ कर्मोंके अनुसार प्रकृतिको क्षुब्ध किया। तब उससे सत्त्व, रज और तम—ये तीन गुण प्रकट हुए॥ ५॥

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