श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
⌕

॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 11.24.6

एकादश स्कन्ध · अध्याय 24 · अथ चतुर्विंशोऽध्यायः

तेभ्यः समभवत् सूत्रं महान् सूत्रेण संयुतः।

ततो विकुर्वतो जातोऽहंकारो यो विमोहनः॥ ६

tebhyaḥ samabhavat sūtraṃ mahān sūtreṇa saṃyutaḥ|

tato vikurvato jāto'haṃkāro yo vimohanaḥ|| 6

अर्थ

उनसे क्रिया-शक्तिप्रधान सूत्र और ज्ञानशक्तिप्रधान महत्तत्त्व प्रकट हुए। वे दोनों परस्पर मिले हुए ही हैं। महत्तत्त्वमें विकार होनेपर अहंकार व्यक्त हुआ। यह अहंकार ही जीवोंको मोहमें डालनेवाला है॥ ६॥

पढ़नेकी विधि

अक्षरका आकार
सामान्य
अध्यायमें क्या दिखे
रोमन लिप्यन्तरण (IAST)
पंक्तियोंके बीच
रंग
सहायता

ये विकल्प केवल इसी ब्राउज़रमें रहते हैं; कहीं भेजे नहीं जाते। कुंजियाँ: ?

↑ ↓ चुनें · Enter खोलें · Esc बन्द

कुंजियाँ

←→
पिछला या अगला पृष्ठ (श्लोक, या अध्याय)
/
खोज
CtrlK
किसी अध्याय या श्लोकपर सीधे जाएँ (Mac: ⌘ K)
AltA
पढ़नेकी विधि
?
यह सूची
Esc
खुली सूची बन्द करें