श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 11.25.28

एकादश स्कन्ध · अध्याय 25 · अथ पञ्चविंशोऽध्यायः

पथ्यं पूतमनायस्तमाहार्यं सात्त्विकं स्मृतम्।

राजसं चेन्द्रियप्रेष्ठं तामसं चार्तिदाशुचि॥ २८

pathyaṃ pūtamanāyastamāhāryaṃ sāttvikaṃ smṛtam|

rājasaṃ cendriyapreṣṭhaṃ tāmasaṃ cārtidāśuci|| 28

अर्थ

आरोग्यदायक, पवित्र और अनायास प्राप्त भोजन सात्त्विक है। रसनेन्द्रियको रुचिकर और स्वादकी दृष्टिसे युक्त आहार राजस है तथा दुःखदायी और अपवित्र आहार तामस है॥ २८॥

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