श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 11.29.1

एकादश स्कन्ध · अध्याय 29 · अथैकोनत्रिंशोऽध्यायः

अथैकोनत्रिंशोऽध्यायः

भागवतधर्मोंका निरूपण और उद्धवजीका बदरिकाश्रमगमन

उद्धव उवाच

सुदुश्‍चरामिमां मन्ये योगचर्यामनात्मनः।

यथांजसा पुमान् सिद्ध्येत् तन्मे ब्रूह्यंजसाच्युत॥ १

suduścarāmimāṃ manye yogacaryāmanātmanaḥ|

yathāṃjasā pumān siddhyet tanme brūhyaṃjasācyuta|| 1

अर्थ

उद्धवजीने कहा—अच्युत! जो अपना मन वशमें नहीं कर सका है, उसके लिये आपकी बतलायी हुई इस योगसाधनाको तो मैं बहुत ही कठिन समझता हूँ। अतः अब आप कोई ऐसा सरल और सुगम साधन बतलाइये, जिससे मनुष्य अनायास ही परमपद प्राप्त कर सके॥ १॥

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