श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 11.29.9

एकादश स्कन्ध · अध्याय 29 · अथैकोनत्रिंशोऽध्यायः

कुर्यात् सर्वाणि कर्माणि मदर्थं शनकैः स्मरन्।

मय्यर्पितमनश्‍चित्तो मद्धर्मात्ममनोरतिः॥ ९

kuryāt sarvāṇi karmāṇi madarthaṃ śanakaiḥ smaran|

mayyarpitamanaścitto maddharmātmamanoratiḥ|| 9

अर्थ

उद्धवजी! मेरे भक्तको चाहिये कि अपने सारे कर्म मेरे लिये ही करे और धीरे-धीरे उनको करते समय मेरे स्मरणका अभ्यास बढ़ाये। कुछ ही दिनोंमें उसके मन और चित्त मुझमें समर्पित हो जायँगे। उसके मन और आत्मा मेरे ही धर्मोंमें रम जायँगे॥ ९॥✎ 2001

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #2001 मुद्रणकी अपनी भूल (गीताप्रेसके पुराने संस्करणों और ग्रन्थकी अपनी गणनासे): धीर- → धीरे-

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