॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 11.3.33
इति भागवतान् धर्मान् शिक्षन् भक्त्या तदुत्थया।
नारायणपरो मायामंजस्तरति दुस्तराम्॥ ३३
iti bhāgavatān dharmān śikṣan bhaktyā tadutthayā|
nārāyaṇaparo māyāmaṃjastarati dustarām|| 33
अर्थ
राजन्! जो इस प्रकार भागवतधर्मोंकी शिक्षा ग्रहण करता है, उसे उनके द्वारा प्रेम-भक्तिकी प्राप्ति हो जाती है और वह भगवान् नारायणके परायण होकर उस मायाको अनायास ही पार कर जाता है, जिसके पंजेसे निकलना बहुत ही कठिन है॥ ३३॥