श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 11.3.42

एकादश स्कन्ध · अध्याय 3 · अथ तृतीयोऽध्यायः

एवं प्रश्‍नमृषीन् पूर्वमपृच्छं पितुरन्तिके।

नाब्रुवन् ब्रह्मणः पुत्रास्तत्र कारणमुच्यताम्॥ ४२

evaṃ praśnamṛṣīn pūrvamapṛcchaṃ piturantike|

nābruvan brahmaṇaḥ putrāstatra kāraṇamucyatām|| 42

अर्थ

एक बार यही प्रश्‍न मैंने अपने पिता महाराज इक्ष्वाकुके सामने ब्रह्माजीके मानस पुत्र सनकादि ऋषियोंसे पूछा था, परन्तु उन्होंने सर्वज्ञ होनेपर भी मेरे प्रश्‍नका उत्तर न दिया। इसका क्या कारण था? कृपा करके मुझे बतलाइये॥ ४२॥

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