श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 11.3.48

एकादश स्कन्ध · अध्याय 3 · अथ तृतीयोऽध्यायः

लब्धानुग्रह आचार्यात् तेन सन्दर्शितागमः।

महापुरुषमभ्यर्चेन्मूर्त्याभिमतयाऽऽत्मनः ॥ ४८

labdhānugraha ācāryāt tena sandarśitāgamaḥ|

mahāpuruṣamabhyarcenmūrtyābhimatayā''tmanaḥ || 48

अर्थ

पहले सेवा आदिके द्वारा गुरुदेवकी दीक्षा प्राप्त करे, फिर उनके द्वारा अनुष्ठानकी विधि सीखे; अपनेको भगवान्‌की जो मूर्ति प्रिय लगे, अभीष्ट जान पड़े, उसीके द्वारा पुरुषोत्तम भगवान्‌की पूजा करे॥ ४८॥

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