॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 11.3.49
शुचिः सम्मुखमासीनः प्राणसंयमनादिभिः।
पिण्डं विशोध्य संन्यासकृतरक्षोऽर्चयेद्धरिम्॥ ४९
śuciḥ sammukhamāsīnaḥ prāṇasaṃyamanādibhiḥ|
piṇḍaṃ viśodhya saṃnyāsakṛtarakṣo'rcayeddharim|| 49
अर्थ
पहले स्नानादिसे शरीर और सन्तोष आदिसे अन्तःकरणको शुद्ध करे, इसके बाद भगवान्की मूर्तिके सामने बैठकर प्राणायाम आदिके द्वारा भूतशुद्धि—नाडी-शोधन करे, तत्पश्चात् विधिपूर्वक मन्त्र, देवता आदिके न्याससे अंगरक्षा करके भगवान्की पूजा करे॥ ४९॥✎ 1933