श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 11.30.23

एकादश स्कन्ध · अध्याय 30 · अथ त्रिंशोऽध्यायः

अथ तावपि सङ्‌क्रुद्धावुद्यम्य कुरुनन्दन।

एरकामुष्टिपरिघौ चरन्तौ जघ्नतुर्युधि॥ २३

atha tāvapi saṅkruddhāvudyamya kurunandana|

erakāmuṣṭiparighau carantau jaghnaturyudhi|| 23

अर्थ

कुरुनन्दन! अब भगवान् श्रीकृष्ण और बलरामजी भी क्रोधमें भरकर युद्धभूमिमें इधर-उधर विचरने और मुट्ठी-की-मुट्ठी एरका घास उखाड़-उखाड़कर उन्हें मारने लगे। एरका घासकी मुट्ठी ही मुद्गरके समान चोट करती थी॥ २३॥

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