श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 11.30.25

एकादश स्कन्ध · अध्याय 30 · अथ त्रिंशोऽध्यायः

एवं नष्टेषु सर्वेषु कुलेषु स्वेषु केशवः।

अवतारितो भुवो भार इति मेनेऽवशेषितः॥ २५

evaṃ naṣṭeṣu sarveṣu kuleṣu sveṣu keśavaḥ|

avatārito bhuvo bhāra iti mene'vaśeṣitaḥ|| 25

अर्थ

जब भगवान् श्रीकृष्णने देखा कि समस्त यदु-वंशियोंका संहार हो चुका, तब उन्होंने यह सोचकर सन्तोषकी साँस ली कि पृथ्वीका बचा-खुचा भार भी उतर गया॥ २५॥

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