जब भगवान् श्रीकृष्णने देखा कि मेरे बड़े भाई बलरामजी परमपदमें लीन हो गये, तब वे एक पीपलके पेड़के तले जाकर चुपचाप धरतीपर ही बैठ गये॥ २७॥✎ 1774
रामनिर्याणमालोक्य भगवान् देवकीसुतः।
निषसाद धरोपस्थे तूष्णीमासाद्य पिप्पलम्॥ २७
जब भगवान् श्रीकृष्णने देखा कि मेरे बड़े भाई बलरामजी परमपदमें लीन हो गये, तब वे एक पीपलके पेड़के तले जाकर चुपचाप धरतीपर ही बैठ गये॥ २७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 11.30.27 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 900) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/11/30/27/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)