उसके पीछे-पीछे भगवान्के दिव्य आयुध भी चले गये। यह सब देखकर दारुकके आश्चर्यकी सीमा न रही। तब भगवान्ने उससे कहा—॥ ४५॥✎ 9071775
तमन्वगच्छन् दिव्यानि विष्णुप्रहरणानि च।
तेनातिविस्मितात्मानं सूतमाह जनार्दनः॥ ४५
उसके पीछे-पीछे भगवान्के दिव्य आयुध भी चले गये। यह सब देखकर दारुकके आश्चर्यकी सीमा न रही। तब भगवान्ने उससे कहा—॥ ४५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 11.30.45 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 902) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/11/30/45/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)