भगवान् श्रीकृष्णके वियोगसे विह्वल होकर वे लोग सिर पीटते हुए वहाँ तुरंत पहुँचे, जहाँ उनके भाई-बन्धु निष्प्राण होकर पड़े हुए थे॥ १७॥✎ 17761777
तत्र स्म त्वरिता जग्मुः कृष्णविश्लेषविह्वलाः।
व्यसवः शेरते यत्र ज्ञातयो घ्नन्त आननम्॥ १७
भगवान् श्रीकृष्णके वियोगसे विह्वल होकर वे लोग सिर पीटते हुए वहाँ तुरंत पहुँचे, जहाँ उनके भाई-बन्धु निष्प्राण होकर पड़े हुए थे॥ १७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 11.31.17 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 905) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/11/31/17/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)