परीक्षित्! उसने अपनेको सँभालकर यदुवंशियोंके विनाशका पूरा-पूरा विवरण कह सुनाया। उसे सुनकर लोग बहुत ही दुःखी हुए और मारे शोकके मूर्च्छित हो गये॥ १६॥✎ 17761777
कथयामास निधनं वृष्णीनां कृत्स्नशो नृप।
तच्छ्रुत्वोद्विग्नहृदया जनाः शोकविमूर्च्छिताः॥ १६
परीक्षित्! उसने अपनेको सँभालकर यदुवंशियोंके विनाशका पूरा-पूरा विवरण कह सुनाया। उसे सुनकर लोग बहुत ही दुःखी हुए और मारे शोकके मूर्च्छित हो गये॥ १६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 11.31.16 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 905) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/11/31/16/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)