अब उनका सिर झुक गया। देवदेवेश भगवान् नारायण हँसते हुए-से उनसे बोले—‘तुमलोग इनमेंसे किसी एक स्त्रीको, जो तुम्हारे अनुरूप हो, ग्रहण कर लो। वह तुम्हारे स्वर्गलोककी शोभा बढ़ानेवाली होगी॥ १४॥✎ 1728
तानाह देवदेवेशः प्रणतान् प्रहसन्निव।
आसामेकतमां वृङ्ध्वं सवर्णां स्वर्गभूषणाम्॥ १४
अब उनका सिर झुक गया। देवदेवेश भगवान् नारायण हँसते हुए-से उनसे बोले—‘तुमलोग इनमेंसे किसी एक स्त्रीको, जो तुम्हारे अनुरूप हो, ग्रहण कर लो। वह तुम्हारे स्वर्गलोककी शोभा बढ़ानेवाली होगी॥ १४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 11.4.14 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 734) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/11/4/14/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)