देवराज इन्द्रके अनुचरोंने ‘जो आज्ञा’ कहकर भगवान्के आदेशको स्वीकार किया तथा उन्हें नमस्कार किया। फिर उनके द्वारा बनायी हुई स्त्रियोंमेंसे श्रेष्ठ अप्सरा उर्वशीको आगे करके वे स्वर्गलोकमें गये॥ १५॥✎ 1728
ओमित्यादेशमादाय नत्वा तं सुरवन्दिनः।
उर्वशीमप्सरःश्रेष्ठां पुरस्कृत्य दिवं ययुः॥ १५
देवराज इन्द्रके अनुचरोंने ‘जो आज्ञा’ कहकर भगवान्के आदेशको स्वीकार किया तथा उन्हें नमस्कार किया। फिर उनके द्वारा बनायी हुई स्त्रियोंमेंसे श्रेष्ठ अप्सरा उर्वशीको आगे करके वे स्वर्गलोकमें गये॥ १५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 11.4.15 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 734) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/11/4/15/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)