नारदजी कहते हैं—वसुदेवजी! मिथिलानरेश राजा निमि नौ योगीश्वरोंसे इस प्रकार भागवतधर्मोंका वर्णन सुनकर बहुत ही आनन्दित हुए। उन्होंने अपने ऋत्विज् और आचार्योंके साथ ऋषभनन्दन नव योगीश्वरोंकी पूजा की॥ ४३॥
धर्मान् भागवतानित्थं श्रुत्वाथ मिथिलेश्वरः।
जायन्तेयान् मुनीन् प्रीतः सोपाध्यायो ह्यपूजयत्॥ ४३
नारदजी कहते हैं—वसुदेवजी! मिथिलानरेश राजा निमि नौ योगीश्वरोंसे इस प्रकार भागवतधर्मोंका वर्णन सुनकर बहुत ही आनन्दित हुए। उन्होंने अपने ऋत्विज् और आचार्योंके साथ ऋषभनन्दन नव योगीश्वरोंकी पूजा की॥ ४३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 11.5.43 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 743) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/11/5/43/