॥ श्रीहरिः ॥
युवयोः खलु दम्पत्योर्यशसा पूरितं जगत्।
पुत्रतामगमद् यद् वां भगवानीश्वरो हरिः॥ ४६
yuvayoḥ khalu dampatyoryaśasā pūritaṃ jagat|
putratāmagamad yad vāṃ bhagavānīśvaro hariḥ|| 46
अर्थ
वसुदेवजी! तुम्हारे और देवकीके यशसे तो सारा जगत् भरपूर हो रहा है; क्योंकि सर्वशक्तिमान् भगवान् श्रीकृष्ण तुम्हारे पुत्रके रूपमें अवतीर्ण हुए हैं॥ ४६॥
युवयोः खलु दम्पत्योर्यशसा पूरितं जगत्।
पुत्रतामगमद् यद् वां भगवानीश्वरो हरिः॥ ४६
वसुदेवजी! तुम्हारे और देवकीके यशसे तो सारा जगत् भरपूर हो रहा है; क्योंकि सर्वशक्तिमान् भगवान् श्रीकृष्ण तुम्हारे पुत्रके रूपमें अवतीर्ण हुए हैं॥ ४६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 11.5.46 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 743) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/11/5/46/