श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 11.5.52

एकादश स्कन्ध · अध्याय 5 · अथ पञ्चमोऽध्यायः

इतिहासमिमं पुण्यं धारयेद् यः समाहितः।

स विधूयेह शमलं ब्रह्मभूयाय कल्पते॥ ५२

itihāsamimaṃ puṇyaṃ dhārayed yaḥ samāhitaḥ|

sa vidhūyeha śamalaṃ brahmabhūyāya kalpate|| 52

अर्थ

राजन्! यह इतिहास परम पवित्र है। जो एकाग्रचित्तसे इसे धारण करता है, वह अपना सारा शोक-मोह दूर करके ब्रह्मपदको प्राप्त होता है॥ ५२॥

इति श्रीमद्भागवते महापुराणे पारमहंस्यां संहितायामेकादशस्कन्धे पञ्चमोऽध्यायः॥ ५॥

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