पुरुषोत्तम सर्वशक्तिमान् प्रभो! आपको यदुवंशमें अवतार ग्रहण किये एक सौ पचीस वर्ष बीत गये हैं॥ २५॥
यदुवंशेऽवतीर्णस्य भवतः पुरुषोत्तम।
शरच्छतं व्यतीयाय पंचविंशाधिकं प्रभो॥ २५
पुरुषोत्तम सर्वशक्तिमान् प्रभो! आपको यदुवंशमें अवतार ग्रहण किये एक सौ पचीस वर्ष बीत गये हैं॥ २५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 11.6.25 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 748) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/11/6/25/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
#1894 मुद्रणकी अपनी भूल (गीताप्रेसके पुराने संस्करणों और ग्रन्थकी अपनी गणनासे): व्यतीताय → व्यतीयाय