श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 11.6.26

एकादश स्कन्ध · अध्याय 6 · अथ षष्ठोऽध्यायः

नाधुना तेऽखिलाधार देवकार्यावशेषितम्।

कुलं च विप्रशापेन नष्टप्रायमभूदिदम्॥ २६

nādhunā te'khilādhāra devakāryāvaśeṣitam|

kulaṃ ca vipraśāpena naṣṭaprāyamabhūdidam|| 26

अर्थ

सर्वाधार! अब हमलोगोंका ऐसा कोई काम बाकी नहीं है, जिसे पूर्ण करनेके लिये आपके यहाँ रहनेकी आवश्यकता हो। ब्राह्मणोंके शापके कारण आपका यह कुल भी एक प्रकारसे नष्ट हो ही चुका है॥ २६॥

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