श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 11.7.36

एकादश स्कन्ध · अध्याय 7 · अथ सप्तमोऽध्यायः

यतो यदनुशिक्षामि यथा वा नाहुषात्मज।

तत्तथा पुरुषव्याघ्र निबोध कथयामि ते॥ ३६

yato yadanuśikṣāmi yathā vā nāhuṣātmaja|

tattathā puruṣavyāghra nibodha kathayāmi te|| 36

अर्थ

वीरवर ययातिनन्दन! मैंने जिससे जिस प्रकार जो कुछ सीखा है, वह सब ज्यों-का-त्यों तुमसे कहता हूँ, सुनो॥ ३६॥

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