श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 11.7.62

एकादश स्कन्ध · अध्याय 7 · अथ सप्तमोऽध्यायः

एकदा जग्मतुस्तासामन्‍नार्थं तौ कुटुम्बिनौ।

परितः कानने तस्मिन्‍नर्थिनौ चेरतुश्‍चिरम्॥ ६२

ekadā jagmatustāsāmannārthaṃ tau kuṭumbinau|

paritaḥ kānane tasminnarthinau ceratuściram|| 62

अर्थ

एक दिन दोनों नर-मादा अपने बच्चोंके लिये चारा लाने जंगलमें गये हुए थे। क्योंकि अब उनका कुटुम्ब बहुत बढ़ गया था। वे चारेके लिये चिरकालतक जंगलमें चारों ओर विचरते रहे॥ ६२॥

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