श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 11.7.64

एकादश स्कन्ध · अध्याय 7 · अथ सप्तमोऽध्यायः

कपोतश्‍च कपोती च प्रजापोषे सदोत्सुकौ।

गतौ पोषणमादाय स्वनीडमुपजग्मतुः॥ ६४

kapotaśca kapotī ca prajāpoṣe sadotsukau|

gatau poṣaṇamādāya svanīḍamupajagmatuḥ|| 64

अर्थ

कबूतर-कबूतरी बच्चोंको खिलाने-पिलानेके लिये हर समय उत्सुक रहा करते थे। अब वे चारा लेकर अपने घोंसलेके पास आये॥ ६४॥

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