श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 11.8.38

एकादश स्कन्ध · अध्याय 8 · अथाष्टमोऽध्यायः

मैवं स्युर्मन्दभाग्यायाः क्लेशा निर्वेदहेतवः।

येनानुबन्धं निर्हृत्य पुरुषः शममृच्छति॥ ३८

maivaṃ syurmandabhāgyāyāḥ kleśā nirvedahetavaḥ|

yenānubandhaṃ nirhṛtya puruṣaḥ śamamṛcchati|| 38

अर्थ

यदि मैं मन्दभागिनी होती तो मुझे ऐसे दुःख ही न उठाने पड़ते, जिनसे वैराग्य होता है। मनुष्य वैराग्यके द्वारा ही घर आदिके सब बन्धनोंको काटकर शान्तिलाभ करता है॥ ३८॥✎ 1740

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1740 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: शान्ति-लाभ → शान्तिलाभ

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