श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 11.8.39

एकादश स्कन्ध · अध्याय 8 · अथाष्टमोऽध्यायः

तेनोपकृतमादाय शिरसा ग्राम्यसंगताः।

त्यक्त्वा दुराशाः शरणं व्रजामि तमधीश्‍वरम्॥ ३९

tenopakṛtamādāya śirasā grāmyasaṃgatāḥ|

tyaktvā durāśāḥ śaraṇaṃ vrajāmi tamadhīśvaram|| 39

अर्थ

अब मैं भगवान्‌का यह उपकार आदरपूर्वक सिर झुकाकर स्वीकार करती हूँ और विषयभोगोंकी दुराशा छोड़कर उन्हीं जगदीश्‍वरकी शरण ग्रहण करती हूँ॥ ३९॥✎ 1740

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1740 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: शान्ति-लाभ → शान्तिलाभ

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