यह जीव संसारके कूएँमें गिरा हुआ है। विषयोंने इसे अंधा बना दिया है, कालरूपी अजगरने इसे अपने मुँहमें दबा रखा है। अब भगवान्को छोड़कर इसकी रक्षा करनेमें दूसरा कौन समर्थ है॥ ४१॥✎ 1740
संसारकूपे पतितं विषयैर्मुषितेक्षणम्।
ग्रस्तं कालाहिनाऽऽत्मानं कोऽन्यस्त्रातुमधीश्वरः॥ ४१
यह जीव संसारके कूएँमें गिरा हुआ है। विषयोंने इसे अंधा बना दिया है, कालरूपी अजगरने इसे अपने मुँहमें दबा रखा है। अब भगवान्को छोड़कर इसकी रक्षा करनेमें दूसरा कौन समर्थ है॥ ४१॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 11.8.41 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 769) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/11/8/41/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)