श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

द्वादश स्कन्ध

13 अध्याय · 566 श्लोक

॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय॥

श्रीमद्भागवतमहापुराणम्

द्वादशः स्कन्धः

  1. 1अथ प्रथमोऽध्यायःकलियुगके राजवंशोंका वर्णन43 श्लोक
    पृष्ठ 907
  2. 2अथ द्वितीयोऽध्यायःकलियुगके धर्म44 श्लोक
    पृष्ठ 911
  3. 3अथ तृतीयोऽध्यायःराज्य, युगधर्म और कलियुगके दोषोंसे बचनेका उपाय—नामसंकीर्तन52 श्लोक
    पृष्ठ 916
  4. 4अथ चतुर्थोऽध्यायःचार प्रकारके प्रलय43 श्लोक
    पृष्ठ 924
  5. 5अथ पञ्चमोऽध्यायःश्रीशुकदेवजीका अन्तिम उपदेश13 श्लोक
    पृष्ठ 930
  6. 6अथ षष्ठोऽध्यायःपरीक्षित‍्की परमगति, जनमेजयका सर्पसत्र और वेदोंके शाखाभेद80 श्लोक
    पृष्ठ 932
  7. 7अथ सप्तमोऽध्यायःअथर्ववेदकी शाखाएँ और पुराणोंके लक्षण25 श्लोक
    पृष्ठ 942
  8. 8अथाष्टमोऽध्यायःमार्कण्डेयजीकी तपस्या और वर-प्राप्ति49 श्लोक
    पृष्ठ 946
  9. 9अथ नवमोऽध्यायःमार्कण्डेयजीका माया-दर्शन34 श्लोक
    पृष्ठ 953
  10. 10अथ दशमोऽध्यायःमार्कण्डेयजीको भगवान् शंकरका वरदान42 श्लोक
    पृष्ठ 958
  11. 11अथैकादशोऽध्यायःभगवान्‌के अंग, उपांग और आयुधोंका रहस्य तथा विभिन्‍न सूर्यगणोंका वर्णन50 श्लोक
    पृष्ठ 963
  12. 12अथ द्वादशोऽध्यायःश्रीमद्भागवतकी संक्षिप्त विषय-सूची68 श्लोक
    पृष्ठ 970
  13. 13अथ त्रयोदशोऽध्यायःविभिन्‍न पुराणोंकी श्‍लोक-संख्या और श्रीमद्भागवतकी महिमा23 श्लोक
    पृष्ठ 979

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