श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 12.1.16

द्वादश स्कन्ध · अध्याय 1 · अथ प्रथमोऽध्यायः

हत्वा बृहद्रथं मौर्यं तस्य सेनापतिः कलौ।

पुष्यमित्रस्तु शुंगाह्वः स्वयं राज्यं करिष्यति।

अग्‍निमित्रस्ततस्तस्मात् सुज्येष्ठोऽथ भविष्यति॥ १६

hatvā bṛhadrathaṃ mauryaṃ tasya senāpatiḥ kalau|

puṣyamitrastu śuṃgāhvaḥ svayaṃ rājyaṃ kariṣyati|

agnimitrastatastasmāt sujyeṣṭho'tha bhaviṣyati|| 16

अर्थ

सोमशर्माका शतधन्वा और शतधन्वाका पुत्र बृहद्रथ होगा। कुरुवंशविभूषण परीक्षित्! मौर्यवंशके ये दस* नरपति कलियुगमें एक सौ सैंतीस वर्षतक पृथ्वीका उपभोग करेंगे। बृहद्रथका सेनापति होगा पुष्यमित्र शुंग। वह अपने स्वामीको मारकर स्वयं राजा बन बैठेगा। पुष्यमित्रका अग्‍निमित्र और अग्‍निमित्रका सुज्येष्ठ होगा॥ १५-१६॥

यह अर्थ श्लोक 15–16 का एक साथ है, जैसा मुद्रित ग्रन्थमें।

टिप्पणियाँ

  1. *

    मौर्योंकी संख्या चन्द्रगुप्तको मिलाकर नौ ही होती है। विष्णुपुराणादिमें चन्द्रगुप्तसे पाँचवें दशरथ नामके एक और मौर्यवंशी राजाका उल्लेख मिलता है। उसीको लेकर यहाँ दस संख्या समझनी चाहिये।

    (मुद्रित पृष्ठ 908)

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