श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 12.1.22

द्वादश स्कन्ध · अध्याय 1 · अथ प्रथमोऽध्यायः

हत्वा काण्वं सुशर्माणं तद‍्भृत्यो वृषलो बली।

गां भोक्ष्यत्यन्ध्रजातीयः कंचित् कालमसत्तमः॥ २२

hatvā kāṇvaṃ suśarmāṇaṃ tadbhṛtyo vṛṣalo balī|

gāṃ bhokṣyatyandhrajātīyaḥ kaṃcit kālamasattamaḥ|| 22

अर्थ

प्रिय परीक्षित्! कण्ववंशी सुशर्माका एक शूद्र सेवक होगा—बली। वह अन्ध्रजातिका एवं बड़ा दुष्ट होगा। वह सुशर्माको मारकर कुछ समयतक स्वयं पृथ्वीका राज्य करेगा॥ २२॥✎ 1780

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1780 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: अनिष्ट-कर्मा, → अनिष्टकर्मा,

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